मीर तक़ी मीर को उर्दू शायरी का 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का देवता) कहा जाता है। उनकी ग़ज़लों में दर्द, विरह और मानवीय संवेदनाओं की जो गहराई है, वह अद्वितीय है। मीर की सादगी और भाषा की रवानी ने उन्हें शास्त्रीय उर्दू साहित्य का एक अमर हस्ताक्षर बना दिया है।