ग़ज़ल
अश्क आंखों में कब नहीं आता
अश्क आंखों में कब नहीं आतालहू आता है जब नहीं आता।
होश जाता नहीं रहा लेकिनजब वो आता है तब नहीं आता।
दिल से रुखसत हुई कोई ख्वाहिशगिरिया कुछ बे-सबब नहीं आता।
इश्क का हौसला है शर्त वरनाबात का किस को ढब नहीं आता।
जी में क्या-क्या है अपने ऐ हमदमहर सुखन ता बा-लब नहीं आता।
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