ग़ज़ल

उम्र भर हम रहे शराबी से

मीर तक़ी मीर · सब कलाम देखें
उम्र भर हम रहे शराबी सेदिल-ए-पुर्खूं की इक गुलाबी से
खिलना कम-कम कली ने सीखा हैउसकी आँखों की नीम ख़्वाबी से
काम थे इश्क़ में बहुत ऐ मीरहम ही फ़ारिग़ हुए शताबी से
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