ग़ज़ल कहा मैंने मीर तक़ी मीर · सब कलाम देखें हिन्दी रोमन कहा मैंने कितना है गुल का सबातकली ने यह सुनकर तब्बसुम कियाजिगर ही में एक क़तरा खूं है सरकशपलक तक गया तो तलातुम कियाकिसू वक्त पाते नहीं घर उसेबहुत 'मीर' ने आप को गम किया पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh