ग़ज़ल

आ जायें हम नज़र जो कोई दम बहुत है याँ

मीर तक़ी मीर · सब कलाम देखें
आ जायें हम नज़र जो कोई दम बहुत है याँमोहलत बसाँ-ए-बर्क़-ओ-शरार कम बहुत है याँ
यक लहज़ा सीना कोबी से फ़ुरसत हमें नहींयानि कि दिल के जाने का मातम बहुत है याँ
हम रहरवाँ-ए-राह-ए-फ़ना देर रह चुकेवक़्फ़ा बसाँ-ए-सुबह् कोई दम बहुत है याँ
हासिल है क्या सिवाये तरै के दहर मेंउठ आस्माँ तले से के शबनम बहुत है याँ
इस बुतकदे में मानी का किस से करें सवालआदम नहीं सूरत-ए-अदम बहुर है याँ
अजाज़-ए-इसवी से नहीं बहस इश्क़ मेंतेरी ही बात जान-ए-मुजस्सिम बहुत है याँ
मेरे हिलाक करने का ग़म है अबस तुम्हेंतुम शाद ज़िंदगानी करो ग़म बहुत है याँ
शायद के काम सुबह् तक अपना खिंचे न 'मीर'अहवाल आज शाम से दरहम बहुत है याँ
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