बशीर बद्र

बशीर बद्र

1935-present
बशीर बद्र एक प्रसिद्ध उर्दू उर्दू शायर हैं, जो अपनी सरल और प्रभावपूर्ण शायरी के लिए जाने जाते हैं।
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Famous Works

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जायेगामगर तुम्हारी तरह कौन मुझे चाहेगा
अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँमेरा लफ़्ज़-लफ़्ज़ हो आईना तुझे आईने में उतार लूँ
आ चाँदनी भी मेरी तरह जाग रही हैपलकों पे सितारों को लिये रात खड़ी है
आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा,कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा
आँसुओं की जहाँ पायमाली रहीऐसी बस्ती चराग़ों से ख़ाली रही
आस होगी न आसरा होगाआने वाले दिनों में क्या होगा
इन आँखों से दिन-रात बरसात होगीअगर ज़िंदगी सर्फ़-ए-जज़्बात होगी
उस दर का दरबान बना दे या अल्लाहमुझको भी सुल्तान बना दे या अल्लाह
ऐ हुस्न-ए-बे-परवाह तुझे शबनम कहूँ शोला कहूँफूलों में भी शोख़ी तो है किसको मगर तुझ-सा कहूँ
ऐसा लगता है ज़िन्दगी तुम होअजनबी जैसे अजनबी तुम हो
कभी तो आसमाँ से चांद उतरे जाम हो जायेतुम्हारे नाम की इक ख़ूबसूरत शाम हो जाये
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में के मेरी नज़र को ख़बर न होमुझे एक रात नवाज़ दे मगर उसके बाद सहर न हो
कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न होमुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो
कहीं चांद राहों में खो गया कहीं चांदनी भी भटक गईमैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई
किस ने मुझको सदा दी बता कौन हैऐ हवा तेरे घर में छुपा कौन है
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता।
कुछ तो मैं भी बहुत दिल का कमज़ोर हूँकुछ मुहब्बत भी है फ़ितरतन बदगुमाँ
कोई काँटा चुभा नहीं होतादिल अगर फूल सा नहीं होता
कोई न जान सका वो कहाँ से आया थाऔर उसने धूूप से बादल को क्यों मिलाया था
कौन आया रास्ते, आईनाख़ाने हो गए,रात रौशन हो गई, दिन भी सुहाने हो गए।
ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न देकि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे
ख़ुश रहे या बहुत उदास रहेज़िन्दगी तेरे आस पास रहे
ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं मेंमाँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में
ख़्वाब इस आँखों से अब कोई चुरा कर ले जायेक़ब्र के सूखे हुये फूल उठा कर ले जाये
ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएंगेरोयेंगे बहुत लेकिन आंसू नहीं आयेंगे
ग़म छुपाते रहे मुस्कुराते रहे,महफ़िलों-महफ़िलों गुनगुनाते रहे
गाँव मिट जायेगा शहर जल जायेगाज़िन्दगी तेरा चेहरा बदल जायेगा
गुलाबों की तरह दिल अपना शबनम में भिगोते हैंमोहब्बत करने वाले ख़ूबसूरत लोग होते हैं
गुलों की तरह हम ने ज़िंदगी को इस कदर जानाकिसी कि ज़ुल्फ़ में इक रात सोना और बिखर जाना
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये ।
तेरा हाथ मेरे काँधे पे दर्या बहता जाता हैकितनी खामोशी से दुख का मौसम गुजरा जाता है
दुआ करो कि ये पौधा सदा हरा ही लगेउदासियों से भी चेहरा खिला-खिला ही लगे
दूसरों को हमारी सज़ायें न देचांदनी रात को बद-दुआयें न दे
पत्थर के जिगर वालों ग़म में वो रवानी हैख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहताकिसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता