ग़ज़ल
पत्थर के जिगर वालों ग़म में वो रवानी है
पत्थर के जिगर वालों ग़म में वो रवानी हैख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
फूलों में ग़ज़ल रखना ये रात की रानी हैइस में तेरी ज़ुल्फ़ों की बे-रब्त कहानी है
एक ज़हन-ए-परेशाँ में वो फूल सा चेहरा हैपत्थर की हिफ़ाज़त में शीशे की जवानी है
क्यों चांदनी रातों में दरिया पे नहाते होसोये हुए पानी में क्या आग लगानी है
इस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहनाहँस कर कोई पूछेगा क्या जान गवानी है
रोने का असर दिल पर रह रह के बदलता हैआँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी है
ये शबनमी लहजा है आहिस्ता ग़ज़ल पढ़नातितली की कहानी है फूलों की ज़बानी है
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