ग़ज़ल

ऐ हुस्न-ए-बेपरवाह तुझे शबनम कहूँ शोला कहूँ

बशीर बद्र · सब कलाम देखें
ऐ हुस्न-ए-बे-परवाह तुझे शबनम कहूँ शोला कहूँफूलों में भी शोख़ी तो है किसको मगर तुझ-सा कहूँ
गेसू उड़े महकी फ़िज़ा जादू करें आँखे तेरीसोया हुआ मंज़र कहूँ या जागता सपना कहूँ
चंदा की तू है चांदनी लहरों की तू है रागिनीजान-ए-तमन्ना मैं तुझे क्या- क्या कहूँ क्या न कहूँ
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