ग़ज़ल
गाँव मिट जायेगा शहर जल जायेगा
गाँव मिट जायेगा शहर जल जायेगाज़िन्दगी तेरा चेहरा बदल जायेगा
कुछ लिखो मर्सिया मसनवी या ग़ज़लकोई काग़ज़ हो पानी में गल जायेगा
अब उसी दिन लिखूँगा दुखों की ग़ज़लजब मेरा हाथ लोहे में ढल जायेगा
मैं अगर मुस्कुरा कर उन्हें देख लूँक़ातिलों का इरादा बदल जायेगा
आज सूरज का रुख़ है हमारी तरफ़ये बदन मोम का है पिघल जायेगा
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