मीराबाई

मीराबाई

1498-1547
मीराबाई भक्तिकाल की प्रसिद्ध कृष्णभक्त कवयित्री थीं, जिनके पद श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण के लिए विख्यात हैं।
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Famous Works

अच्छे मीठे फल चाख चाख, बेर लाई भीलणी।ऎसी कहा अचारवती, रूप नहीं एक रती।
अजब सलुनी प्यारी मृगया नैनों। तें मोहन वश कीधोरे॥ध्रु०॥गोकुळमां सौ बात करेरे बाला कां न कुबजे वश लीधोरे॥१॥
अपनी गरज हो मिटी सावरे हाम देखी तुमरी प्रीत॥ध्रु०॥आपन जाय दुवारका छाय ऐसे बेहद भये हो नचिंत॥ ठोर०॥१॥
राग रामकलीअब तो निभायाँ सरेगी, बांह गहेकी लाज।
अब तो मेरा राम नाम दूसरा न कोई॥माता छोडी पिता छोडे छोडे सगा भाई।
राग मिश्र काफी- ताल तितालाअब तौ हरी नाम लौ लागी।
राणा जी...हे राणा जीराणा जी अब न रहूंगी तोर हठ की
अरज करे छे मीरा रोकडी। उभी उभी अरज॥ध्रु०॥माणिगर स्वामी मारे मंदिर पाधारो सेवा करूं दिनरातडी॥१॥
आई ती ते भिस्ती जनी जगत देखके रोई।मातापिता भाईबंद सात नही कोई।
राग टोडीआओ मनमोहना जी जोऊं थांरी बाट।
राग हमीरआओ सहेल्हां रली करां है पर घर गवण निवारि॥
आज मारे साधुजननो संगरे राणा। मारा भाग्ये मळ्यो॥ध्रु०॥साधुजननो संग जो करीये पियाजी चडे चोगणो रंग रे॥१॥
आज मेरेओ भाग जागो साधु आये पावना॥ध्रु०॥अंग अंग फूल गये तनकी तपत गये।
आज मोहिं लागे वृन्दावन नीको॥घर-घर तुलसी ठाकुर सेवा दरसन गोविन्द जी को॥१॥
बंसीवारा आज्यो म्हारे देस। सांवरी सुरत वारी बेस।।ॐ-ॐ कर गया जी, कर गया कौल अनेक।
आतुर थई छुं सुख जोवांने घेर आवो नंद लालारे॥ध्रु०॥गौतणां मीस करी गयाछो गोकुळ आवो मारा बालारे॥१॥
राम मिलण के काज सखी, मेरे आरति उर में जागी री।तड़पत-तड़पत कल न परत है, बिरहबाण उर लागी री।
आयी देखत मनमोहनकू। मोरे मनमों छबी छाय रही॥ध्रु०॥मुख परका आचला दूर कियो। तब ज्योतमों ज्योत समाय रही॥२॥
राग वृन्दावनीआली, म्हांने लागे वृन्दावन नीको।
राग हंस नारायणआली , सांवरे की दृष्टि मानो, प्रेम की कटारी है॥
आली रे मेरे नैणा बाण पड़ी।चित्त चढ़ो मेरे माधुरी मूरत उर बिच आन अड़ी।
कठण थयां रे माधव मथुरां जाई। कागळ न लख्यो कटकोरे॥ध्रु०॥अहियाथकी हरी हवडां पधार्या। औद्धव साचे अटक्यारे॥१॥
राग पीलूकरुणा सुणो स्याम मेरी, मैं तो होय रही चेरी तेरी॥
सखी मेरी नींद नसानी हो।पिवको पंथ निहारत सिगरी, रैण बिहानी हो।
कहां गयोरे पेलो मुरलीवाळो। अमने रास रमाडीरे॥ध्रु०॥रास रमाडवानें वनमां तेड्या मोहन मुरली सुनावीरे॥१॥
कागळ कोण लेई जायरे मथुरामां वसे रेवासी मेरा प्राण पियाजी॥ध्रु०॥ए कागळमां झांझु शूं लखिये। थोडे थोडे हेत जणायरे॥१॥
काना चालो मारा घेर कामछे। सुंदर तारूं नामछे॥ध्रु०॥मारा आंगनमों तुलसीनु झाड छे। राधा गौळण मारूं नामछे॥१॥
काना तोरी घोंगरीया पहरी होरी खेले किसन गिरधारी॥१॥जमुनाके नीर तीर धेनु चरावत खेलत राधा प्यारी॥२॥
कान्हा कानरीया पेहरीरे॥ध्रु०॥जमुनाके नीर तीर धेनु चरावे। खेल खेलकी गत न्यारीरे॥१॥
कान्हा बनसरी बजाय गिरधारी। तोरि बनसरी लागी मोकों प्यारीं॥ध्रु०॥दहीं दुध बेचने जाती जमुना। कानानें घागरी फोरी॥ काना०॥१॥
कान्हो काहेकूं मारो मोकूं कांकरी। कांकरी कांकरी कांकरीरे॥ध्रु०॥गायो भेसो तेरे अवि होई है। आगे रही घर बाकरीरे॥ कानो॥१॥
कायकूं देह धरी भजन बिन कोयकु देह गर्भवासकी त्रास देखाई धरी वाकी पीठ बुरी॥ भ०॥१॥कोल बचन करी बाहेर आयो अब तूम भुल परि॥ भ०॥२॥
कारे कारे सबसे बुरे ओधव प्यारे॥ध्रु०॥कारेको विश्वास न कीजे अतिसे भूल परे॥१॥
कालोकी रेन बिहारी। महाराज कोण बिलमायो॥ध्रु०॥काल गया ज्यां जाहो बिहारी। अही तोही कौन बुलायो॥१॥
किन्ने देखा कन्हया प्यारा की मुरलीवाला॥ध्रु०॥जमुनाके नीर गंवा चरावे। खांदे कंबरिया काला॥१॥