ग़ज़ल
अजब सलुनी प्यारी मृगया नैनों
अजब सलुनी प्यारी मृगया नैनों। तें मोहन वश कीधोरे॥ध्रु०॥गोकुळमां सौ बात करेरे बाला कां न कुबजे वश लीधोरे॥१॥मनको सो करी ते लाल अंबाडी अंकुशे वश कीधोरे॥२॥लवींग सोपारी ने पानना बीदला राधांसु रारुयो कीनोरे॥३॥मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर चरणकमल चित्त दीनोरे॥४॥
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