ग़ज़ल
अब न रहूंगी तोर हठ की
राणा जी...हे राणा जीराणा जी अब न रहूंगी तोर हठ की
साधु संग मोहे प्यारा लागेलाज गई घूंघट कीहार सिंगार सभी ल्यो अपनाचूड़ी कर की पटकी
महल किला राणा मोहे न भाएसारी रेसम पट कीराणा जी... हे राणा जीजब न रहूंगी तोर हठ की
भई दीवानी मीरा डोलेकेस लटा सब छिटकीराणा जी... हे राणा जी!अब न रहूंगी तोर हठ की।
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