दादू दयाल

दादू दयाल

1544-1603
दीवान पढ़ें (Read Diwan)

Famous Works

अजहूँ न निकसे प्रान कठोर .दरसन बिना बहुत दिन बीते सुंदर प्रीतम मोर.
अरे मेरा अमर उपावणहार रे।खालिक आशिक तेरा॥टेक॥
अहो नर नीका है हरिनाम।दूजा नहीं नाँउ बिन नीका, कहिले केवल राम॥टेक॥
आव पियारे मीत हमारे।::निस-दिन देखूँ पाँव तुम्हारे॥टेक॥
इत है नीर नहावन जोग॥अनतहि भरम भूला रे लोग॥टेक॥
कबहूँ ऐसा बिरह उपावै रे।पिव बिन देऐं जीव जावै रे॥टेक॥
कोइ जान रे मरम माधइया केरौ।कैसें रहै करै का सजनी प्राण मेरौ॥टेक॥
क्यों बिसरै मेरा पीव पियारा।जीवकी जीवन प्राण हमारा॥टेक॥
घीव दूध में रमि रह्या व्यापक सब हीं ठौरदादू बकता बहुत है मथि काढै ते और
जगसूँ कहा हमारा।जब देख्या नूर तुम्हारा॥टेक॥
जागि रे सब रैण बिहाणी।जाइ जनम अँजुलीको पाणी॥टेक॥
तब हम एक भये रे भाई।मोहन मिल साँची मति आई॥टेक॥
तहाँ मुझ कमीन की कौन चलावै।जाका अजहूँ मुनि जन महल न पावै।।
तू साँचा साहिब मेरा।करम करीम कृपाल निहारौ, मैं जन बंदा तेरा॥टेक॥
तूँ हीं मेरे रसना तूँ हीं मेरे बैना।तूँ हीं मेरे स्रवना तूँ हीं मेरे नैना॥टेक॥
====साखी भाग====*
दादू दीया है भला, दिया करो सब कोय।घर में धरा न पाइए, जो कर दिया न होय।
नूर रह्या भरपूर, अमीरस पीजिये।रस मोहैं रस होइ, लाहा लीजिये॥टेक॥
पंडित राम मिलै सो कीजै।पढ़ि-पढ़ि बेद पुराण बखाने,
हिंदू तुरक न जाणों दोइ।साँईं सबका सोई है रे, और न दूजा देखौं कोइ॥टेक॥
बाबा नाहीं दूजा कोई।एक अनेकन नाँव तुम्हारे, मो पैं और न होई॥टेक॥
बिरहणिकौं सिंगार न भावै।है कोइ ऐसा राम मिलावै॥टेक॥
भाई रे! ऐसा पंथ हमाराद्वै पख रहितपंथ गह पुरा अबरन एक अघारा
मन मुरिखा तैं यौंहीं जनम गँवायौ।साँईकेरी सेवा न कीन्हीं, इही कलि काहेकूँ आऔ॥टेक॥