ग़ज़ल
तहाँ मुझ कमीन की कौन चलावै
तहाँ मुझ कमीन की कौन चलावै।जाका अजहूँ मुनि जन महल न पावै।।स्यौ विरंचि नारद मुनि गाबे, कौन भाँति करि निकटि बुलावै।।1देवा सकल तेतीसौ कोडि, रहे दरबार ठाड़े कर जोड़ि।।2सिध साधक रहे ल्यौ लाई, अजहूँ मोटे महल न पाइ।।3सवतैं नीच मैं नांव न जांनां, कहै दादू क्यों मिले सयाना।।4
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