ग़ज़ल
बटाऊ रे चलना आज कि काल
हिंदू तुरक न जाणों दोइ।साँईं सबका सोई है रे, और न दूजा देखौं कोइ॥टेक॥
कीट-पतंग सबै जोनिनमें, जल-थल संगि समाना सोइ।पीर पैगम्बर देव-दानव, मीर-मलिक मुनि-जनकौं मोहि॥१॥
करता है रे सोई चीन्हौं, जिन वै रोध करै रे कोइ।जैसैं आरसी मंजन कीजै, राम-रहीम देही तन धोइ॥२॥
साँईंकेरी सेवा कीजै पायौ धन काहेकौं खोइ।दादू रे जन हरि भज लीजै, जनम-जनम जे सुरजन होइ॥३॥
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