ग़ज़ल
अरे मेरा अमर उपावणहार रे
अरे मेरा अमर उपावणहार रे।खालिक आशिक तेरा॥टेक॥
तुमसूँ राता तुमसूँ माता।तुमसूँ लागा रंग रे खालिक॥१॥
तुमसूँ खेला तुमसूँ मेला।तुमसूँ प्रेम-सनेह रे खालिक॥२॥
तुमसूँ लैणा तुमसूँ दैणा।तुमहीसूँ रत होइ रे खालिक॥३॥
खालिक मेरा आशिक तेरा।दादू अनत न जाइ रे खालिक॥४॥
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