भूषण
1613-1715
दीवान पढ़ें (Read Diwan)
Famous Works
इंद्र निज हेरत फिरत गज इंद्र अरु,
इंद्र को अनुज हेरै दुगध नदीश कौं.
इन्द्र जिमि जंभ पर, बाडब सुअंभ पर,
रावन सदंभ पर, रघुकुल राज हैं।
गरुड़ को दावा जैसे नाग के समूह पर
:::दावा नाग जूह पर सिंह सिरताज को
चकित चकत्ता चौंकि चौंकि उठै बार बार,
दिल्ली दहसति चितै चाहि करषति है.
जिहि फन फुत्कार उड़त पहाड़ भार,
कूरम कठिन जनु कमल बिदगिलो.
ता दिन अखिल खलभलै खल खलक में,
जा दिन सिवाजी गाजी नेक करखत हैं.
तेरे हीं भुजान पर भूतल को भार,
कहिबे को सेसनाग दिननाग हिमाचल है.
दाढ़ी के रखैयन की दाढ़ी सी रहत छाती
बाढ़ी मरजाद जसहद्द हिंदुवाने की
दारा की न दौर यह, रार नहीं खजुबे की,
बाँधिबो नहीं है कैंधो मीर सहवाल को.
प्रेतिनी पिसाच अरु निसाचर निशाचरहू,
मिलि मिलि आपुस में गावत बधाई हैं.
बाने फहराने घहराने घंटा गजन के,
नाहीं ठहराने राव राने देस-देस के.
ब्रह्म के आनन तें निकसे अत्यंत पुनीत तिहूँ पुर मानी .
राम युधिष्ठिर के बरने बलमीकहु व्यास के अंग सोहानी.
राखी हिन्दुवानी हिन्दुवान को तिलक राख्यौ
अस्मृति पुरान राखे वेद धुन सुनी मैं
सबन के ऊपर ही ठाढ़ो रहिबे के जोग,
ताहि खरो कियो जाय जारन के नियरे .
साजि चतुरंग सैन अंग में उमंग धरि
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत है