ग़ज़ल

ता दिन अखिल खलभलै खल खलक में

भूषण · सब कलाम देखें
ता दिन अखिल खलभलै खल खलक में,जा दिन सिवाजी गाजी नेक करखत हैं.सुनत नगारन अगार तजि अरिन की,दागरन भाजत न बार परखत हैं.छूटे बार बार छूटे बारन ते लाल ,देखि भूषण सुकवि बरनत हरखत हैं .क्यों न उत्पात होहिं बैरिन के झुण्डन में,करे घन उमरि अंगारे बरखत हैं .
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