रैदास

रैदास

1450-1520
दीवान पढ़ें (Read Diwan)

Famous Works

अखि लखि लै नहीं का कहि पंडित, कोई न कहै समझाई।अबरन बरन रूप नहीं जाके, सु कहाँ ल्यौ लाइ समाई।। टेक।।
अब कुछ मरम बिचारा हो हरि।आदि अंति औसांण राम बिन, कोई न करै निरवारा हो हरि।। टेक।।
अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी ।प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी , जाकी अँग-अँग बास समानी ।
अब मैं हार्यौ रे भाई।थकित भयौ सब हाल चाल थैं, लोग न बेद बड़ाई।। टेक।।
अब मोरी बूड़ी रे भाई।ता थैं चढ़ी लोग बड़ाई।। टेक।।
।। राग गौड़ी।।अब हम खूब बतन घर पाया।
अबिगत नाथ निरंजन देवा।मैं का जांनूं तुम्हारी सेवा।। टेक।।
।। राग धनाश्री।।अहो देव तेरी अमित महिमां, महादैवी माया।
आज दिवस लेऊँ बलिहारा ।मेरे घर आया रामका प्यारा ॥टेक॥
।। राग गुंड।।आज नां द्यौस नां ल्यौ बलिहारा।
आयौ हो आयौ देव तुम्ह सरनां।जांनि क्रिया कीजै अपनों जनां।। टेक।।
।। राग सूही।।इहि तनु ऐसा जैसे घास की टाटी।
।। राग सोरठी।।इहै अंदेसा सोचि जिय मेरे।
।। राग भैरूँ।।।ऐसा ध्यान धरूँ बनवारी।
ऐसी भगति न होइ रे भाई।रांम नांम बिन जे कुछ करिये, सो सब भरम कहाई।। टेक।।
।। राग आसा।।ऐसी मेरी जाति भिख्यात चमारं।
ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै ।गरीब निवाजु गुसाईआ मेरा माथै छत्रु धरै ॥
।। राग गौड़।।ऐसे जानि जपो रे जीव।
ऐसौ कछु अनभै कहत न आवै।साहिब मेरौ मिलै तौ को बिगरावै।। टेक।।
कवन भगितते रहै प्यारो पाहुनो रे ।घर घर देखों मैं अजब अभावनो रे ॥टेक॥
कहा सूते मुगध नर काल के मंझि मुख।तजि अब सति राम च्यंतत अनेक सुख।। टेक।।
।। राग केदारौ।।कहि मन रांम नांम संभारि।
।। राग आसावरी (आसा)।।केसवे बिकट माया तोर।
।। राग विलावल।।क्या तू सोवै जणिं दिवांनां।
गाइ गाइ अब का कहि गाऊँ।गांवणहारा कौ निकटि बतांऊँ।। टेक।।