ग़ज़ल
इहै अंदेसा सोचि जिय मेरे
।। राग सोरठी।।
इहै अंदेसा सोचि जिय मेरे।निस बासुरि गुन गाँऊँ रांम तेरे।। टेक।।तुम्ह च्यतंत मेरी च्यंता हो न जाई, तुम्ह च्यंतामनि होऊ कि नांहीं।।१।।भगति हेत का का नहीं कीन्हा, हमारी बेर भये बल हीनां।।२।।कहै रैदास दास अपराधी, जिहि तुम्ह ढरवौ सो मैं भगति न साधी।।३।।
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