ग़ज़ल

इहि तनु ऐसा जैसे घास की टाटी

रैदास · सब कलाम देखें
।। राग सूही।।
इहि तनु ऐसा जैसे घास की टाटी।जलि गइओ घासु रलि गइओ माटी।। टेक।।ऊँचे मंदर साल रसोई। एक घरी फुनी रहनु न होई।।१।।भाई बंध कुटंब सहेरा। ओइ भी लागे काढु सवेरा।।२।।घर की नारि उरहि तन लागी। उह तउ भूतु करि भागी।।३।।कहि रविदास सभै जग लूटिआ। हम तउ एक राम कहि छूटिआ।।४।।
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