नंददास

नंददास

1533-1583
दीवान पढ़ें (Read Diwan)

Famous Works

अरी चल दूल्हे देखन जाय ।सुंदर श्याम माधुरी मूरत अँखिया निरख सिराय ॥१॥
ऊधव को उपदेश सुनो ब्रज-नागरीरूप सील लावण्य सबै गुन आगरी
छोटो सो कन्हैया एक मुरली मधुर छोटी,छोटे-छोटे सखा संग छोटी पाग सिर की।
जुरि चली हें बधावन नंद महर घर सुंदर ब्रज की बाला।कंचन थार हार चंचल छबि कही न परत तिहिं काला॥१॥
झूलत राधामोहन, कालिंदी के कूल।सघन लता सुहावनी, चहुंदिश फूलें फूल ॥१॥
नंद भवन को भूषण माई ।यशुदा को लाल, वीर हलधर को, राधारमण सदा सुखदाई ॥
फल फलित होय फलरूप जाने ।देखिहु ना सुनी ताहि की आपुनी, काहु की बात कहो कैसे जु माने ॥१॥
माई आज तो गोकुल ग्राम कैसो रह्यो फ़ूल के । गृह फूले एसे जैसे संपति समूल के ॥१॥ माई आज तो…फूलि फूलि घटा आईं घर घर घूम के । फूली फूली बरखा होत झर लायो झूम के ॥२॥ माई आज तो…
माई फूल को हिंडोरो बन्यो, फूल रही यमुना ।फूलन के खंभ दोऊ, डांडी चार फूलन की, फूलन बनी मयार फूल रहे विलना ॥१॥
सूर आयौ माथे पर, छाया आई पाइँन तर,उतर ढरे पथिक डगर देखि छाँह गहरी ।