ग़ज़ल
झूलत राधामोहन
झूलत राधामोहन, कालिंदी के कूल।सघन लता सुहावनी, चहुंदिश फूलें फूल ॥१॥सखी जुरी चहुँदिश तें, कमल नयन की ओर।बोलत वचन अमृतमय, नंददास चित्तचोर॥२॥
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