ग़ज़ल

छोटो सो कन्हैया एक मुरली मधुर छोटी

नंददास · सब कलाम देखें
छोटो सो कन्हैया एक मुरली मधुर छोटी,छोटे-छोटे सखा संग छोटी पाग सिर की।छोटी सी लकुटि हाथ छोटे वत्स लिए साथ,छोटी कोटि छोटी पट छोटे पीताम्बर की॥छोटे से कुण्डल कान, मुनिमन छुटे ध्यान,छोटी-छोटी गोपी सब आई घर-घर की।'नंददास प्रभु छोटे, वेद भाव मोटे-मोटे,खायो है माखन सोभा देखहुँ बदन की॥फूलन की माला हाथ, फूली सब सखी साथ,झाँकत झरोखा ठाडी नंदिनी जनक की।देखत पिय की शोभा, सिय के लोचन लोभा,एक टक ठाडी मानौ पूतरी कनक की॥पिता सों कहत बात, कोमल कमल गात,राखिहौ प्रतिज्ञा कैसे शिव के धनक की।'नंददास' हरि जान्यो, तृन करि तोरयो ताहि,बाँस की धनैया जैसे बालक के कर की॥
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