रामनरेश त्रिपाठी

रामनरेश त्रिपाठी

1889-1962
दीवान पढ़ें (Read Diwan)

Famous Works

अतुलनीय जिनके प्रताप का,साक्षी है प्रत्यक्ष दिवाकर।
मैं ढूँढता तुझे था, जब कुंज और वन में।तू खोजता मुझे था, तब दीन के सदन में॥
बाजे अस्तोदय की वीणा--क्षण-क्षण गगनांगण में रे।::हुआ प्रभात छिप गए तारे,
यदि रक्त बूँद भर भी होगा कहीं बदन मेंनस एक भी फड़कती होगी समस्त तन में।
जहाँ स्वतंत्र विचार न बदले मन में मुख में।जहाँ न बाधक बनें सबल निबलों के सुख में।
चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र,इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र।
पहने धोती कुरता झिल्लीगमछे से लटकाये किल्ली
बहुत जुकाम हुआ नंदू को,एक रोज वह इतना छींका।
एक दिन मोहन प्रभात ही पधारे, उन्हेंदेख फूल उठे हाथ-पांव उपवन के ।
चंदा मामा गए कचहरी, घर में रहा न कोई,मामी निशा अकेली घर में कब तक रहती सोई!
मन-मोहिनी प्रकृति की गोद में जो बसा है।सुख-स्वर्ग-सा जहाँ है वह देश कौन-सा है?
हे प्रभो! आनन्द दाता ज्ञान हमको दीजिए।शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिए।