ग़ज़ल

कामना

रामनरेश त्रिपाठी · सब कलाम देखें
जहाँ स्वतंत्र विचार न बदले मन में मुख में।जहाँ न बाधक बनें सबल निबलों के सुख में।
सब को जहाँ समान निजोन्नति का अवसर हो।शांतिदायिनी निशा हर्ष सूचक वासर हो।
सब भाँति सुशासित हों जहाँ::समता के सुखकर नियम।बस, उसी स्वतंत्र स्वदेश में::जागें हे जगदीश! हम॥
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