ग़ज़ल

तिल्ली सिंह

रामनरेश त्रिपाठी · सब कलाम देखें
पहने धोती कुरता झिल्लीगमछे से लटकाये किल्लीकस कर अपनी घोड़ी लिल्लीतिल्ली सिंह जा पहुँचे दिल्ली
पहले मिले शेख जी चिल्लीउनकी बहुत उड़ाई खिल्लीचिल्ली ने पाली थी बिल्लीतिल्ली ने थी पाली पिल्ली
पिल्ली थी दुमकटी चिबिल्लीउसने धर दबोच दी बिल्लीमरी देख कर अपनी बिल्लीगुस्से से झुँझलाया चिल्ली
लेकर लाठी एक गठिल्लीउसे मारने दौड़ा चिल्लीलाठी देख डर गया तिल्लीतुरंत हो गई धोती ढिल्ली
कस कर झटपट घोड़ी लिल्लीतिल्ली सिंह ने छोड़ी दिल्लीहल्ला हुआ गली दर गल्लीतिल्ली सिंह ने जीती दिल्ली !
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.