केशवदास
1555-1617
दीवान पढ़ें (Read Diwan)
Famous Works
'केशव सूधो विलोचन सूधी, विलोकनि कों अवलोकै सदाई।
सूधिये बात सुनै समुझे, कहि आवत सूधियै बात सुहाई॥
'केसव' चौंकति सी चितवै, छिति पाँ धरिकै तरकै तकि छाँहीं।
बूझिये और कहै मुख और, सु और की और भई छिन माहीं॥
किधौं मुख कमल ये कमला की ज्योति होति,
किधौं चारु मुख चंद चंदिका चुराई है।
कैटभ सो,नरकासुर सो,पल में मधु सो,मुर सो जिन मारयो.
लोक चतुर्दश रक्षक केशव, पूर्ण वेद पुरान विचारयो .
चंचल न हूजै नाथ, अंचल न खैंची हाथ ,
सोवै नेक सारिकाऊ, सुकतौ सोवायो जू .
जौं हौं कहौं रहिए तौ प्रभुता प्रगट होति,
चलन कहौं तौ हित हानि नाहिं सहनो.
प्रथम सकल सुचि मज्जन अमल बास,
जावक सुदेस केस-पास को सम्हारिबौ।