ग़ज़ल
प्रथम सकल सुचि मज्जन अमल बास
प्रथम सकल सुचि मज्जन अमल बास,जावक सुदेस केस-पास को सम्हारिबौ।अंगराज भूषन बिबिध मुखबास-राग,कज्जल कलित लोल लोचन निहारिबौ॥बोलनि हँसनि मृदु चाकरी, चितौनि चार,पल प्रति पर प्रतिबत परिपालिबौ।'केसोदास' सबिलास करहु कुँवरि राधे,इहि बिधि सोरहै सिंगारनि सिंगारिबौ॥
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