चंदबरदाई
1149-1200
दीवान पढ़ें (Read Diwan)
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तन तेज तरनि ज्यों घनह ओप .
प्रगटी किरनि धरि अग्नि कोप .
पूरब दिसि गढ गढनपति, समुद-सिषर अति द्रुग्ग।
तहँ सु विजय सुर-राजपति, जादू कुलह अभग्ग॥
प्रन्म्म प्रथम मम आदि देव
ऊंकार सब्द जिन करि अछेव