ग़ज़ल
प्रन्म्म प्रथम मम आदि देव
प्रन्म्म प्रथम मम आदि देवऊंकार सब्द जिन करि अछेवनिरकार मध्य साकार कीनमनसा विलास सह फल फलीनबरन्यौ आदि-करता अलेखगुन सहित गुननि नह रूप रेखजिहि रचे सुरग भूसत पतालजम ब्रम्ह इन्द्र रिषी लोकपालअसि-लक्ख-चार रच जीव जंतबरनंत ते न लहों अंतकरि सके न कोई अग्याहि भंगधरि हुकुम सिस दुख सहे अंगदिनमान देव रवि रजनि भोरउग्गई बनें प्रभु हुकुम जोरससि सदा राति अग्या अधीनउग्गैएँ अकास होय कला हीनपरिमान अप्प लंघै न कोईकरै सोई क्रम प्रभु हुकुम जोईबरन्यौ वेड ब्रह्मा अछेहजल थलह पूरि रह्यौ देह-देह .
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