ग़ज़ल

आते आते मेरा नाम

वसीम बरेलवी · सब कलाम देखें
आपको देख कर देखता रह गयाक्या कहूँ और कहने को क्या रह गया
आते-आते मेरा नाम-सा रह गयाउस के होंठों पे कुछ काँपता रह गया
वो मेरे सामने ही गया और मैंरास्ते की तरह देखता रह गया
झूठ वाले कहीं से कहीं बढ़ गयेऔर मैं था कि सच बोलता रह गया
आँधियों के इरादे तो अच्छे न थेये दिया कैसे जलता हुआ रह गया
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