ग़ज़ल
ऐसे भक्ति मोहे भावे उद्धवजी
ऐसे भक्ति मोहे भावे उद्धवजी ऐसी भक्ति ।सरवस त्याग मगन होय नाचे जनम करम गुन गावे ॥ उ०॥ध्रु०॥कथनी कथे निरंतर मेरी चरन कमल चित लावे ॥मुख मुरली नयन जलधारा करसे ताल बजावे ॥उ०॥१॥जहां जहां चरन देत जन मेरो सकल तिरथ चली आवे ।उनके पदरज अंग लगावे कोटी जनम सुख पावे ॥उ०॥२॥उन मुरति मेरे हृदय बसत है मोरी सूरत लगावे ।बलि बलि जाऊं श्रीमुख बानी सूरदास बलि जावे ॥उ०॥३॥
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