ग़ज़ल

ऊधौ, कर्मन की गति न्यारी

सूरदास · सब कलाम देखें
ऊधौ, कर्मन की गति न्यारी।सब नदियाँ जल भरि-भरि रहियाँ सागर केहि बिध खारी॥उज्ज्वल पंख दिये बगुला को कोयल केहि गुन कारी॥सुन्दर नयन मृगा को दीन्हे बन-बन फिरत उजारी॥मूरख-मूरख राजे कीन्हे पंडित फिरत भिखारी॥सूर श्याम मिलने की आसा छिन-छिन बीतत भारी॥
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