ग़ज़ल

कनक रति मनि पालनौ, गढ्यो काम सुतहार

सूरदास · सब कलाम देखें
कनक रति मनि पालनौ, गढ्यो काम सुतहार ।बिबिध खिलौना भाँति के, गजमुक्ता चहुँधार ॥जननी उबटि न्हवाइ के, क्रम सों लीन्हे गोद ।पौढाए पट पालने, निरखि जननि मन मोद ॥अति कोमल दिन सात के, अधर चरन कर लाल ।सूर श्याम छबि अरुनता, निरखि हरष ब्रज बाल ॥
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