ग़ज़ल
कन्हैया हालरू रे
कन्हैया हालरू रे ।गुढि गुढि ल्यायो बढई धरनी पर डोलाई बलि हालरू रे ॥१॥इक लख मांगे बढै दुई नंद जु देहिं बलि हालरू रे ।रत पटित बर पालनौ रेसम लागी डोर बलि हालरू रे ॥२॥कबहुँक झूलै पालना कबहुँ नन्द की गोद बलि हालरू रे ।झूलै सखी झुलावहीं सूरदास, बलि जाइ बलि हालरू रे ॥३॥
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