ग़ज़ल
ऊधौ,तुम हो अति बड़भागी
ऊधौ,तुम हो अति बड़भागी.अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी.पुरइनि पात रहत जल भीतर,ता रस देह न दागी.ज्यों जल मांह तेल की गागरि,बूँद न ताकौं लागी.प्रीति-नदी में पाँव न बोरयौ,दृष्टि न रूप परागी.'सूरदास' अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यों पागी.
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