ग़ज़ल
ऊधो, मन माने की बात
ऊधो, मन माने की बात।दाख छुहारो छांड़ि अमृतफल, बिषकीरा बिष खात॥जो चकोर कों देइ कपूर कोउ, तजि अंगार अघात।मधुप करत घर कोरि काठ में, बंधत कमल के पात॥ज्यों पतंग हित जानि आपुनो दीपक सो लपटात।सूरदास, जाकौ जासों हित, सोई ताहि सुहात॥
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