ग़ज़ल

अब हों नाच्यौ बहुत गोपाल

सूरदास · सब कलाम देखें
अब हों नाच्यौ बहुत गोपाल।काम क्रोध कौ पहिरि चोलना, कंठ विषय की माल॥महामोह के नूपुर बाजत, निन्दा सब्द रसाल।भरम भर्‌यौ मन भयौ पखावज, चलत कुसंगति चाल॥तृसना नाद करति घट अन्तर, नानाविध दै ताल।माया कौ कटि फैंटा बांध्यो, लोभ तिलक दियो भाल॥कोटिक कला काछि दिखराई, जल थल सुधि नहिं काल।सूरदास की सबै अविद्या, दूरि करौ नंदलाल॥
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