ग़ज़ल

ऐसे संतनकी सेवा

सूरदास · सब कलाम देखें
ऐसे संतनकी सेवा । कर मन ऐसे संतनकी सेवा ॥ध्रु०॥शील संतोख सदा उर जिनके । नाम रामको लेवा ॥ क०॥१॥आन भरोसो हृदय नहि जिनके । भजन निरंजन देवा ॥ क०॥२॥जीन मुक्त फिरे जगमाही । ज्यु नारद मुनी देवा ॥ क०॥३॥जिनके चरन कमलकूं इच्छत । प्रयाग जमुना रेवा ॥ क०॥४॥सूरदास कर उनकी संग । मिले निरंजन देवा ॥ क०॥५॥
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