ग़ज़ल
तुम ये कैसे जुदा हो गये
तुम ये कैसे जुदा हो गयेहर तरफ़ हर जगह हो गये
अपना चेहरा न बदला गयाआईने से ख़फ़ा हो गये
जाने वाले गये भी कहाँचाँद सूरज घटा हो गये
बेवफ़ा तो न वो थे न हमयूँ हुआ बस जुदा हो गये
आदमी बनना आसाँ न थाशेख़ जी पारसा हो गये
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