ग़ज़ल

एक दिन

निदा फ़ाज़ली · सब कलाम देखें
सूरज एक नटखट बालक सादिन भर शोर मचाएइधर उधर चिड़ियों को बिखेरेकिरणों को छितरायेकलम, दरांती, बुरुश, हथोड़ाजगह जगह फैलायेशामथकी हारी मां जैसीएक दिया मलकाएधीरे धीरे सारीबिखरी चीजें चुनती जाये।
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