ग़ज़ल
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल हैजहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है
हर एक फूल किसी याद-सा महकता हैतेरे ख़याल से जागी हुई फिजाएँ हैंये सब्ज़ पेड़ हैं या प्यार की दुआएँ हैंतू पास हो के नहीं फिर भी तू मुक़ाबिल है
हर एक शय है मोहब्बत के नूर से रोशनये रोशनी जो ना हो ज़िन्दगी अधूरी हैराह-ए-वफ़ा में कोई हमसफ़र ज़रूरी हैये रास्ता कहीं तनहा कटे तो मुश्किल है
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