ग़ज़ल

जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलौना है

निदा फ़ाज़ली · सब कलाम देखें
जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलौना हैदो आँखों में एक से हँसना एक से रोना है
जो जी चाहे वो मिल जाये कब ऐसा होता हैहर जीवन जीवन जीने का समझौता है
अब तक जो होता आया है वो ही होना हैरात अँधेरी भोर सुहानी यही ज़माना है
हर चादर में दुख का ताना सुख का बाना हैआती साँस को पाना जाती साँस को खोना है
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