ग़ज़ल
अब ख़ुशी है न कोई ग़म रुलाने वाला
अब खुशी है न कोई ग़म रुलाने वालाहमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला
हर बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहराजिस तरफ़ देखिए आने को है आने वाला
उसको रुखसत तो किया था मुझे मालूम न थासारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला
दूर के चांद को ढूंढ़ो न किसी आँचल मेंये उजाला नहीं आंगन में समाने वाला
इक मुसाफ़िर के सफ़र जैसी है सबकी दुनियाकोई जल्दी में कोई देर में जाने वाला
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