ग़ज़ल
कठ-पुतली है या जीवन है
कठ-पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मतसोच से ही सारी उलझन है जीते जाओ सोचो मत.
लिखा हुआ किरदार कहानी में ही चलता फिरता हैकभी है दूरी कभी मिलन है जीते जाओ सोचो मत.
नाच सको तो नाचो जब थक जाओ तो आराम करोटेढ़ा क्यूँ घर का आँगन है जीते जाओ सोचो मत.
हर मज़हब का एक ही कहना जैसा मालिक रक्खे रहनाजब तक साँसों का बंधन है जीते जाओ सोचो मत.
घूम रहे हैं बाज़ारों में सरमायों के आतिश-दानकिस भट्टी में कौन ईंधन है जीते जाओ सोचो मत.
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