ग़ज़ल

जितनी बुरी कही जाती है

निदा फ़ाज़ली · सब कलाम देखें
जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनियाबच्चों के स्कूल में शायद तुम से मिली नहीं है दुनिया.
चार घरों के एक मोहल्ले के बाहर भी है आबादीजैसी तुम्हें दिखाई दी है सब की वही नहीं है दुनिया.
घर में ही मत उसे सजाओ इधर उधर भी ले के जाओयूँ लगता है जैसे तुम से अब तक खुली नहीं है दुनिया.
भाग रही है गेंद के पीछे जाग रही है चाँद के नीचेशोर भरे काले नारों से अब तक डरी नहीं है दुनिया.
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