ग़ज़ल
तेरा नाम नहीं
तेरे पैरों चला नहीं जोधूप छाँव में ढला नहीं जोवह तेरा सच कैसे,जिस पर तेरा नाम नहीं?
तुझसे पहले बीत गया जोवह इतिहास है तेरातुझको हीं पूरा करना हैजो बनवास है तेरातेरी साँसें जिया नहीं जोघर आँगन का दिया नहीं जोवो तुलसी की रामायण हैतेरा राम नहीं.
तेरा हीं तन पूजा घर हैकोई मूरत गढ़ लेकोई पुस्तक साथ न देगीचाहे जितना पढ़ लेतेरे सुर में सजा नहीं जोइकतारे पर बजा नहीं जोवो मीरा की संपत्ति हैतेरा श्याम नहीं.
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh