ग़ज़ल

जाने वालों से राब्ता रखना

निदा फ़ाज़ली · सब कलाम देखें
जाने वालों से राब्ता रखनादोस्तो रस्म-ए-फातिहा रखना
घर की तामीर चाहे जैसी होइसमें रोने की कुछ जगह रखना
मस्जिदें हैं नमाजियों के लिएअपने घर में कहीं खुदा रखना
जिस्म में फैलने लगा है शहरअपनी तन्हाईयाँ बचा रखना
उमर करने को है पचास को पारकौन है किस जगह पता रखना
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