ग़ज़ल

अरी चल दूल्हे देखन जाय

नंददास · सब कलाम देखें
अरी चल दूल्हे देखन जाय ।सुंदर श्याम माधुरी मूरत अँखिया निरख सिराय ॥१॥जुर आई ब्रज नार नवेली मोहन दिस मुसकाय ।मोर बन्यो सिर कानन कुंडल बरबट मुख ही सुहाय ॥२॥पहरे बसन जरकसी भूषन अंग अंग सुखकाय ।केसी ये बनी बरात छबीली जगमग चुचाय ॥३॥गोप सबा सरवर में फूले कमल परम लपटाय ।नंददास गोपिन के दृग अलि लपटन को अकुलाय ॥४॥
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